सती माता मंदिर का इतिहास


सती माता मंदिर का इतिहास
राजस्थान के सलूम्बर जिला के एक गांव का नाम बड़ावली हे , बड़ावली गाव में एक प्राचीन मंदिर हे सती माता का ,
मनोहर सिंह पिता अनाड़ सिंह राठौड़ इस गांव के निवासी थे, मनोहर सिंह आर्मी में थे, और देश की रक्षा के लिए हमेशा भारत के किसी ना किसी बॉर्डर पर रहते थे. लेकिन गांव का प्रेम उनका हार साल बड़ावली लाता था, गर्मी की छुटियो में वो अपने परिवार के सात गांव आते थे
एक दिन मनोहर सिंह राठौड़ जी और उनकी धर्मपत्नी दोनों पुरानी बडावली दर्शन करने के लिए गए और उस टाइम मूर्ति के नाम पर दो पत्थर लेकर आमडाई के तालाब के पास सती माता के नाम से दो पत्थर रखे |
फिर यह बात पूरे गाँव वालों को पता चली . फिर इसके बाद गाँव वालों ने सोच-समझकर धूल सिंह जी पेमजी बावसी के पातरवये थे और रघुनाथ सिंह जी मद्रावत उनको भैरवजी का भार आता था और केसरसिंह बल्लाऔर गायरी मोंगजी दादा उनको भी भैरवजी का भार आता था इन सबकी सहमति से बड़ावली से पुरानी बड़ावली (टांडा) गए सती माता मंदिर के पास जाकर ढोल नगाड़ो के साथ पूजा की और बैठक हुई और उसमे वचन दिया की आप मुझे ले जा सकते हो

फिर केसरसिंह जी बल्ला ने मूर्ति पकड़ी फिर वहां से चले रुपेर तालाब के पास वहां पे मूर्ति रखी तो मूर्ति भारी हो गयी वह से उठा नहीं पाए उसमे भूत पालीत घुस गया. फिर केसरसिंह जी बल्लाऔर ने दिमांग लगाकर मूर्ति को अमडाई तालाब पे लाये
तालाब के पास सती माता की मूर्ति खुली थी , जब मनोहर सिंह राठौड़ ने देखा की मूर्ति चारों तरफ़ से खुली हे, जानवर आते हे तब मनोहर सिंह राठौड़ जी ने एक छोटा सा मदिर का निर्माण कराया और उस मंदिर में एक झंडा एक घूघरा लगाया.
फिर कई सालों तक वो छोटा मंदिर वहाँ रहा. उसके बाद २०२० में दुर्जन सिंह राठौड़ पिता केशर सिंह राठौड़ ने गांव से चंदा करके बड़ा मंदिर बनाने को सोचा और आज बड़ा मंदिर बन गया.
आज इस मंदिर को देख रेख प्रताप सिंह राठौड़ और निर्भय सिंह राठौड़ कर रहे हे